Today I got in the Local Train
तकरीबन 8:14 बजे मैं ठाकुर्ली स्टेशन प्लेटफार्म पर आ चुका था। जब प्लेटफॉर्म पर पहुँचा तब लेडीज स्पेशल ट्रेन आई नही थी, जो करीबन 10 मिनट देरी से आई। ट्रेन्स लेट होने के कारण कल्याण से आने वाली हर ट्रैन भरचक थी। उसके बाद मैंने मुम्बईकी ओर जाने वाली तीन ट्रेन्स छोड़ दी। वही 1 नंबर प्लेटफॉर्म पर कल्याण ट्रैन आई, जो कि 3-4 मिनट देरी से चल रही थी। वह ट्रैन रिटर्न में ठाकुर्ली स्टेशन पर 8:48 की सेमीफास्ट ट्रैन हो जाती है। बैठने के लिए जगह मिल जाये और आगे का सफर आराम से कटे इसलिए मैं उस ट्रैन में बीचवाले फर्स्ट क्लास कंपार्टमेंट में बैठ गया। ट्रैन कल्याण स्टेशन पहुचने से पहले पत्रिपुल के पास रुकी। मैं कृतज्ञता (gratitude) की प्रैक्टिस करते हुए भगवान को आभार व्यक्त कर रहा था। अचानक मेरी नजर ट्रैन में लगे एक बोर्ड पर गई, जिस पर लिखा था 'To Seat 38 Passengers' । बोर्ड पढ़ते ही मैं उस विधान पर विचार करने लगा। अलग अलग विचार मेरे मन मे आये। • यहां लिखा है '38 पैसेंजर्स' तो अगर लोकल ट्रेन में उस डब्बेमे सिर्फ 38 पैसेंजर्स को ही ले जाया जाए तो कैसा होगा। लोकल ट्रेन में बैठने के लिए ...