Posts

Showing posts from 2020

Can I mail you in Hindi?

मेरा जन्म भले ही गुजरात के कच्छ में हुआ हो, पर मैं मुम्बई के सबर्ब घाटकोपर और डोम्बिवली में बड़ा हुआ। घाटकोपर में हम 'डूंगरी' पर रहते थे, वहाँ से अपग्रेड करके जूनी पुलिस चौकी के पीछे की एक चाल में रहे, पांचवी तक कि पढ़ाई घाटकोपर में हुई उसके बाद डोम्बिवली में नहेरु मैदान इलाकेमें एक बिल्डिंग के चौथे माले पर फ्लैटमे रहने गए। आगे की पढ़ाई वहाँ पूरी हुई। मैं गुजराती मीडियम का अबाव एवरेज छात्र रहा हूँ। पर दसवीं या एसएससी के बाद इंग्लिश में ही आगे की पढ़ाई हुई। इंग्लिश पहले से ही मेरा फेवरिट सब्जेक्ट भी रहा है और भारत मे खास कर मुम्बई में, बिज़नेस लैंग्वेज के रूप में इंग्लिश का चलन ज्यादा रहा है। शायद इसी वजह से आज लिखने, लिखकर वार्तालाप करने और लिखकर अपने विचार प्रकट करना मैं ज्यादा प्रेफर करता हुँ। आज मुझे मेरी फर्स्ट लैंग्वेज गुजराती लिखने में ज्यादा मुश्किल होती है। कंप्यूटर, मोबाइल और गूगल के द्वारा बनाये गए इंडिक कीबोर्ड से हिंदी या अन्य भारतीय भाषा, जो मैं समझ सकता हु, उसे टाइप करते समय भी मैं इंग्लिश में वर्ड टाइप करना प्रेफर करता हुँ। शुध्द वर्णमालावाले कीबोर्ड पे टाइप करते स...

Today I got in the Local Train

तकरीबन 8:14 बजे मैं ठाकुर्ली स्टेशन प्लेटफार्म पर आ चुका था। जब प्लेटफॉर्म पर पहुँचा तब लेडीज स्पेशल ट्रेन आई नही थी, जो करीबन 10 मिनट देरी से आई। ट्रेन्स लेट होने के कारण कल्याण से आने वाली हर ट्रैन भरचक थी। उसके बाद मैंने मुम्बईकी ओर जाने वाली तीन ट्रेन्स छोड़ दी। वही 1 नंबर प्लेटफॉर्म पर कल्याण ट्रैन आई, जो कि 3-4 मिनट देरी से चल रही थी। वह ट्रैन रिटर्न में ठाकुर्ली स्टेशन पर 8:48 की सेमीफास्ट ट्रैन हो जाती है। बैठने के लिए जगह मिल जाये और आगे का सफर आराम से कटे इसलिए मैं उस ट्रैन में बीचवाले फर्स्ट क्लास कंपार्टमेंट में बैठ गया। ट्रैन कल्याण स्टेशन पहुचने से पहले पत्रिपुल के पास रुकी। मैं कृतज्ञता (gratitude) की प्रैक्टिस करते हुए भगवान को आभार व्यक्त कर रहा था। अचानक मेरी नजर ट्रैन में लगे एक बोर्ड पर गई, जिस पर लिखा था 'To Seat 38 Passengers' । बोर्ड पढ़ते ही मैं उस विधान पर विचार करने लगा। अलग अलग विचार मेरे मन मे आये।  • यहां लिखा है '38 पैसेंजर्स' तो अगर लोकल ट्रेन में उस डब्बेमे सिर्फ 38 पैसेंजर्स को ही ले जाया जाए तो कैसा होगा। लोकल ट्रेन में बैठने के लिए ...

Stop Spending So Much Time In Your Head

​તમારા મગજમાં સમય પસાર કરવાનું બંધ કરો ​by Darius Foroux, લેખક ડેરીયસ ફોરોક્સ  dariusforoux.com ​ઓગષ્ટ ૧૫,  ૨૦૧૬ હું તમારા વિશે જાણ્યા વગર પણ તમારા વિશે થોડું જાણું છું. હું ખાતરીપૂર્વક કહી શકું છું કે તમે તમારા મગજમાં ઘણો સમય પસાર કરો છો.  તમને કહું: "વિચારવું, ચિંતા કરવી, તણાવ, ગભરાઈ જવું" તમે તેને જે પણ કહો. હું તેને "વિચારોથી ભરેલું મન" કહીશ, પણ ક્યા વિચારો? ૯૯% વિચારો નકામા હોય છે. વિલિયમ જેમ્સ તેને સારી રીતે કહે છે: "હું મારા પુરા જીવનમાં વ્યવહારુ બાબતોથી ભ્રમિત છું." વ્યવહારિક તત્વ જ્ઞાન, વ્યવહારિક જ્ઞાન, વાસ્તવિક પુસ્તકો અને વ્યવહારિક સલાહ. આ વિચાર યથાર્થવાદ (pragmatism) કે વ્યવહારવાદમાંથી આવ્યા, જે એક તત્વજ્ઞાન કે દાર્શનિક પરંપરા છે, જે અમેરિકામાં ૧૯મી સદીમાં પ્રચલિત થઈ હતી. ચાર્લ્સ સેન્ડર્સ પીઅર્સ જેઓ હાર્વર્ડ પ્રોફેસર હતા તેઓ "યથાર્થવાદ ના પિતા" મનાય છે, પણ વિલિયમ જેમ્સ, જેઓ એક તબીબમાંથી દાર્શનિક થયા જેમને ખરા અર્થમાં આ દર્શનશાસ્ત્રની વ્યાખ્યા કરી. વિચારો, ચિંતા, અને તણાવ વિશે વિલિયમ જેમ્સ કહે છે: યથાર્થવાદ એમ માને છે કે મન એક ઓજાર છે....